जब आधुनिकता के दौर में बच्चे अपने माँ-बाप को भूल रहे हैं,
जब आधुनिकता के दौर में बच्चे अपने माँ-बाप को भूल रहे हैं, बुजुर्गों को नज़र-अंदाज़ कर रहे हैं, तब बर्धमान के कर्ज़न गेट पर एक अलग ही नज़ारा दिखा!* मारवाड़ी युवा मंच 'बर्धमान' शाखा ने अपने पितरों को याद करते हुए 16 दिन तक महा-भंडारा शुरू किया है।* संगठन के अध्यक्ष पवन अग्रवाल और सचिव बिमल कुमार लौटी ने बताया कि यह भोजन वितरण 27 सितंबर से महानवमी तक चलेगा, जिसमें रोज़ 450 से 500 ज़रूरतमंद लोगों को पूरी-सब्जी, मीठा और पानी खिलाया जाएगा। ये सिर्फ भोजन नहीं, अपने पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा है। >रिपोर्ट: आवाज़-बर्धमान* BENGALI REPORT যখন আধুনিকতার দৌড়ে সন্তানরা তাদের বাবা-মাকে ভুলে যাচ্ছে, বয়স্কদের অবহেলা করছে, ঠিক তখনই বর্ধমানের কার্জন গেটে দেখা গেল এক অন্য ছবি! মাড়োয়াড়ি যুব মঞ্চ 'বর্ধমান' শাখা তাদের পিতৃপুরুষদের স্মরণে ১৬ দিন ব্যাপী মহা-ভান্ডারার আয়োজন করেছে। সংগঠনের সভাপতি পবন আগরওয়াল এবং সম্পাদক বিমল কুমার লৌটি জানিয়েছেন যে এই ভোগ বিতরণ ২৭শে সেপ্টেম্বর থেকে মহানবমী পর্যন্ত চলবে, যেখানে প্রতিদিন ৪৫০ থেকে ৫০০ জন অসহায় মানুষকে পুরি-সবজি, মিষ্টি ও জল খাওয়...